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राजनीतिकरण के दांव पेंच में फसी फिल्म, निर्माता ने इस प्लेटफार्म में उतारा…

छत्तीसगढ़ में चुनावी माहौल के बीच किसानों के मान-सम्मान और उनके समस्याओं से जुड़ी एक फिल्म जो कि कुछ दिनों पहले सिनेमा हॉल में रिलीज की गई थी लेकिन कुछ राजनीतिक दलों के विरोध के कारण इसे फिर टॉकीज से हटा दिया गया क्योंकि इस फिल्म का नाम है काहे के चिंता है काका जिंदा है। 4 साल पूर्व एक गाना जो इसी टाइटल पर आधारित था काहे के चिंता है काका जिंदा है तभी से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर इस गाना को देखते हुए आंका जा रहा था और भूपेश बघेल को काका के नाम से छत्तीसगढ़ में जाना जाने लगा।

काहे के चिंता है काका जिंदा हे Full film yaha dekhe

 

चुकी छत्तीसगढ़ में अभी चुनावी माहौल है 20 सीटों पर मतदान हो चुका है बाकी के 70 सीटों पर मतदान होना अभी बाकी है इसलिए इस फिल्म को चुनावी प्रचार के रूप में भी देखा जा रहा है लेकिन फिल्म निर्माता का कहना है कि इस फिल्म का राजनीति से कोई भी लेना-देना नहीं है पूरे फिल्म में जो की 2 घंटे 15 मिनट की है किसी भी पार्टी विशेष या किसी  का प्रचार या उल्लेख नहीं किया गया है।

चुनावी क्रश को देखते हुए फिल्म मेकर्स ने इसे यूट्यूब प्लेटफार्म में उतारा है जो की 10 नवंबर को YRFILMSCG में दिखाई जाएगी वह भी फ्री होगी जनता के लिए।

 

फिल्म कका अभी जिंदा है राजनीतिकरण में फसी

फिल्म मेकर्स ने निकाला मूवी चलने का नया रास्ता

 

उसकी समस्याओं को लेकर ये फिल्म बनी है। दो माह पहले ही इस फिल्म को रिलीज होना था लेकिन सेंसर बोर्ड के लेट लतीफी के कारण इस फिल्म् को 13 अक्टूबर को रिलीज करना ‌पड़ा। हमें उमीद है कि हमारी जो आगामी प्रोजेक्ट रहेगा उसमें इसका लाभ मिलेगा। पत्रवार्ता में प्रोडयूसर

मनोज खरे,सह निर्माता व संगीतकार हेमलाल चतुर्वेदी, फिल्म के हिरो पवन

गांधी एक्टर ज्द्ममज्द्मीर सिवानी, राजेज्द्म गुप्ता प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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